राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 157वीं जयंती विशेषांक

खादी पहनो,
देश का मान बढ़ाओ!

2 अक्टूबर गांधी जयंती के पावन अवसर पर खादी परिधान में अपनी सेल्फी खींचिए, स्वदेशी का संकल्प लीजिए और तुरंत अपना अधिकृत 'Khadi Pride Certificate' प्राप्त करके व्हाट्सएप पर शेयर कीजिए।

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निःशुल्क डिजिटल सम्मान पत्र • तुरंत व्हाट्सएप शेयरिंग • फ्रंट कैमरा सपोर्ट
खादी सील
“खादी पहनें, स्वदेशी अपनाएं और देश का गौरव बढ़ाएं।”
खादी सेल्फी अभियान #IWearKhadi #khandi.png

#IWearKhadi • #SelfieWithKhadi

छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड

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खादी सेल्फी अपलोड्स

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स्वदेशी खादी संकल्प

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सहभागी शहर व जिले

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बुनकरों को सीधा प्रोत्साहन

सरल सहभागिता

केवल ३ आसान चरणों में भाग लें

कोई लंबा फॉर्म नहीं, कोई जटिल प्रक्रिया नहीं। अपनी खादी सेल्फी क्लिक करें और तुरंत गर्व से भरा सम्मान पत्र पाएं।

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खादी पहनें व सेल्फी लें

फ्रंट कैमरा ऑन करें, अपनी पसंदीदा खादी पोशाक में देशभक्ति फ्रेम के साथ एक सुंदर सेल्फी क्लिक करें।

२

नाम व शहर दर्ज करें

अपना नाम, मोबाइल नंबर और शहर दर्ज करें ताकि आपका आधिकारिक 'Khadi Ambassador' सर्टिफिकेट तैयार हो सके।

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सर्टिफिकेट पाएं व शेयर करें

अपनी तस्वीर युक्त एचडी सम्मान पत्र डाउनलोड करें और व्हाट्सएप स्टेटस व सोशल मीडिया पर साझा करें।

सेल्फी पेज पर जाएं (Open Selfie Page)
राष्ट्रीय स्वाभिमान

खादी क्यों है भारत का गौरव?

खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और करोड़ों ग्रामीण बुनकरों के जीवन की धड़कन है।

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बापू की प्रेरणा

महात्मा गांधी ने विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और आत्मनिर्भरता के लिए चरखा और खादी को स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया।

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बुनकरों का संबल

प्रत्येक खादी वस्त्र की खरीद से सीधे ग्रामीण कारीगरों, कतिनों और हथकरघा बुनकरों के घरों में खुशहाली आती है।

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100% पर्यावरण अनुकूल

हाथ से काता और बुना यह प्राकृतिक कपड़ा शून्य कार्बन फुटप्रिंट छोड़ता है तथा सभी मौसमों में आरामदायक रहता है।

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'लोकल फॉर वोकल'

आधुनिक भारत का युवा आज गर्व से खादी पहनता है। यह हमारी समृद्ध परंपरा और आधुनिक फैशन का अनुपम संगम है।

🇮🇳 राष्ट्रीय खादी संकल्प 2026

"मैं संकल्प लेता/लेती हूँ कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों को अपनाते हुए वर्ष भर खादी व हथकरघा वस्त्रों को प्राथमिकता दूंगा तथा स्वदेशी कारीगरों को सशक्त बनाने में अपना योगदान करूंगा।"

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